• VIVEK KUMAR SHUKLA

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें


कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

सुर छेड़ो आप नये सरगम के, मैं नगमे लिख फरियाद करूँ। कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

सोचें जो ये सोच सके जग वाले, और नजरों की भाषा अपनी हो। कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

चल चलें इस कोलाहल से दुर कहीं, जहां आँसू भी अपने, खुशियां अपनी हो।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

चाँदनी जो उतरे आँगन में, शीतलता उसकी अपने मन में हो।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

ऐसी ईक दुनिया हो जहाँ, जेठ की तपिश भी अपनी हो, सावन की बारिश अपनी हो।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो.... ।

क्या समझेंगे पिछे वाले, साँसों की स्वर में बातें हो।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

साँस तुम्हारी आये जब भी, धड़कन वो मेरी हो, साँस मेरी जाये जब भी, धड़कन वो तुम्हारी हो।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

प्रेम हमारा कुछ ऐसा हो, बहार आये वो अपना हो, पतझड़ बस ईक सपना हो।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो..... ।

कुछ आप कहो, कुछ हम कहें, और बातें हौले-हौले हो...... ।

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