• VIVEK KUMAR SHUKLA

नींद अब नहीं आती


नींद अब नहीं आती, रात यूँ गुजरती है ; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

चादरों की सिलवटें, कुछ इस तरह से डँसती है; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

ख्यालों में तन्हाँई की बिजली जब कड़कती है; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

दिल में जज्बातों की बदली जब घिड़ती है; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

ख्वाबों में मुहब्बत की जब हल्की परछाईं सी दिखती है; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

जुदाई के कंटकों के खौफ से रूह जब कपसती है; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

नींद अब नहीं आती, रात यूँ गुजरती है ; मैं इधर तड़पता हूँ, वो उधर तड़पती है ।

"नींद अब नहीं आती ।"

#happines #Tears #love

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