• VIVEK KUMAR SHUKLA

वो इंसान बड़ा है


ना हिन्दू बड़ा है, ना मुस्लमान बड़ा है, मानवता को धर्म मानो तो, जो इंसानियत को पूजे, वो इंसान बड़ा है ।

ना गीता बड़ा है, ना कुरान बड़ा है, इनके मर्म और ग्यान को, समझे वो इंसान बड़ा है ।

ना अल्लाह बड़ा है, ना भगवान बड़ा है, जो सेवा करे दूजे का, वो इंसान बड़ा है ।

ना मांदिर बड़ा है, ना मास्जिद बड़ा है, जो रैनबसेरा दे बेघर को, वो मरैया बड़ा है ।

ना राम बड़ा है, ना रहीम बड़ा है, जो प्यास बुझाये प्यासे का, वो मुहीम बड़ा है ।

ना झुग्गी वाला छोटा है, ना महल वाला बड़ा है, जो जीव को साताये वो छोटा, जो जीव को हासाये वो इंसान बड़ा है ।

ना पंडित बड़ा है , ना मुल्लाह बड़ा है, जो सबको अपने दिल में बसाये, वो इंसान बड़ा है ।

ना तूँ बड़ा है, ना मैं बड़ा हूँ, हम दोनो इंसान है, ये इंसान बड़ा है ।

ना गीता बड़ा है, ना कुरान बड़ा है, इनके मर्म और ग्यान को, समझे वो इंसान बड़ा है ।

ना हिन्दू बड़ा है, ना मुस्लमान बड़ा है, मानवता को धर्म मानो तो, जो इंसानियत को पूजे, वो इंसान बड़ा है ।

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