• VIVEK KUMAR SHUKLA

वो शहर कहाँ?


हौसलों का शहर, उम्मीदों का शहर, कहाँ हैं उम्मीदें? टूटा हौसला शहर का, कल तक सफल लोगों की राजधानी था, जो शहर, ढ़ूँढ़ता है सफलता को, जो है छुपा उसमें ही कहीं?

अपनो का शहर, अपना शहर, अपना तो है आज भी, अपने कहाँ?

रफ्तारों का शहर, मेहनतकशों का शहर, रफ्तार तो है आज भी, मेहनतकश कहाँ?

ख्वाबों का शहर, ख्वाइहशोँ का शहर, ख्वाब तो है आज भी, ख्वाइहशें कहाँ?

'ढ़ूँढ़ता हूँ उस शहर को जिसमें, लोग लोग को जानते थे, अपने अपनो को पहचानते थे । ख्वाब जहाँ किसी का जूनून बन जाता था, ख्वाइहशें किसी की मौनसुन बन जाती थी। अरमान किसी का कोई और पुरा करता था ।।

जहाँ द्वेष प्रतियोगी नहीं, प्रतिद्वंदी किया करते थे, उस जाने-पहचाने शहर को, जो हौसलों का शहर, उम्मीदों का शहर होता था ।'

"वो शहर कहाँ है? "

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